यह घोषणापत्र अर्पित है उन भारतीय नागरिकों व सैनिकों को- जो एक मुर्दा क़ौम में रहते हुए भी- खुद को जिन्दा समझते हैं!

बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

अध्याय- 11: विमुद्रीकरण


11.1   भारतीय रुपये का विमुद्रीकरण किया जायेगा, जिसके दौरानः
       (क) नये किस्म के नोट छपवा कर प्रचलित नोटों को रद्द किया जायेगा और चरणबद्ध तरीके से तथा कम-से-कम समय के अन्दर प्रचलित नोटों के साथ इनकी अदला-बदली की जायेगी। (जाहिर है, पहले हजार के नोट बदले जायेंगे, तब पाँच सौ के, फिर सौ के और अन्त में छोटे मूल्य वर्ग के।)
       (ख) नये किस्म के नोटों पर किसी व्यक्ति विशेष की मुखाकृति नहीं छापी जायेगी, बल्कि प्राचीन भारतीय मुद्राओं के चित्र को अलग-अलग मूल्यवर्ग के नोटों पर उकेरा जायेगा; जैसे- हजार के नोट पर वैदिक कालीन कौड़ी’, पाँच सौ के नोट पर सिन्धु   कालीन मुद्रा, सौ के नोट पर अशोक की मुद्रा, पचास के नोट पर समुद्रगुप्त की मुद्रा- इसी प्रकार।
       (ग) अदला-बदली के दौरान एक हजार रुपये तक की राशि को डाकघर की शाखाओं में तथा पाँच हजार रुपये तक की राशि को बैंकों की शाखाओं में हाथों-हाथ बदला जायेगा।
       (घ) पाँच हजार रुपये तथा इससे बड़ी राशि को पास बुकके माध्यम से बदला जायेगा- यानि, पुराने नोटों को जमा करके नये नोटों का भुगतान लेना पड़ेगा।
       (ङ) पचास हजार रुपये से अधिक की राशि को बदलने के लिये आयकर विभाग की मंजूरी अनिवार्य होगी।
       (च) भविष्य के लिए ऐसी व्यवस्था की जायेगी कि प्रत्येक 20 वर्षों में एक बार समीक्षा हो और काले धन तथा नकली नोट की समस्या उजागर होने पर विमुद्रीकरणकी इस प्रक्रिया को दुहराया जाय।
11.2   कहने की आवश्यकता नहीं, नोटों की अदला-बदली पूरी होने तक प्रचलित नोट चलन में ही रहेंगे।

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1 टिप्पणी:

  1. सन्दर्भ: हजार-पाँच सौ के नोट रद्द होने बाद फैली अफरा-तफरी
    ***
    उनकी जगह अगर मैं होता, तो-
    1. पहले पर्याप्त मात्रा में नोट छपवाता,
    2. फिर पर्याप्त संख्या में सन्दूकों का इन्तजाम कर उन सन्दूकों में नोटों को पैक करवाता,
    3. इसके बाद सेनाओं को एक “आपात्कालीन टास्क” के लिए सतर्क करता,
    4. तब जाकर मैं नोटबन्दी की घोषणा करता,
    5. घोषणा के तुरन्त बाद सेना को कहा जाता- इतने सन्दूकों को देश के इतने विन्दुओं तक पहुँचाना है- वह भी कुछ ही घण्टों के अन्दर- अब इसके लिए आपलोग गाड़ियों का इस्तेमाल करें या हवाई जहाज का, या फिर अन्तरिक्षयान का- बस इन सन्दूकों को निर्धारित विन्दुओं तक पहुँच जाना है,
    6. अन्तिम निर्देश होता- सभी सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों, पुलिस बलों और अर्द्धसैन्य बलों के लिए कि वे हर शहर, हर कस्बे, हर गाँव के मैदानों में विशेष शिविर लगायें- नोटों की अदला-बदली के लिए,
    इस प्रकार, ज्यादा-से-ज्यादा 72 घण्टों के अन्दर यह काम पूरा हो जाता.
    मगर यहाँ सिर्फ रिजर्व बैंक और बैंकों के भरोसे सारा काम छोड़ दिया गया है- यहाँ तक कि बैंकों के ‘ग्राहक सेवा केन्द्रों’ से भी मदद नहीं ली गयी है... नतीजा सामने है- अफरा-तफरी।
    रिजर्व बैंक तो सिर्फ आदेश झाड़ने वाली संस्था है- काम करना तो कुछ आता नहीं उन्हें। बैंक वाले काम करते हैं, मगर उनके पास मैन-पावर की कमी है- साथ ही, ‘ट्रान्स्पोर्टेशन व्यवस्था’ तो वहाँ होती ही नहीं है।
    मेरा सिद्धान्त होता- दूर-दराज का एक मामूली आदमी एक दिन के लिए भी परेशान हो तो क्यों हो?
    ***
    मेरे उपर्युक्त कथन में ‘शिविर’ वाली जो बात आयी है, वह घोषणापत्र के क्रमांक 11.1 (ग) का विकल्प हो सकता है.

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