यह घोषणापत्र अर्पित है उन भारतीय नागरिकों व सैनिकों को- जो एक मुर्दा क़ौम में रहते हुए भी- खुद को जिन्दा समझते हैं!

शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2016

अध्याय- 2: अलगाववाद, आतंकवाद तथा भेद-भाव के खिलाफ


       अलगाववाद
2.1    देश के नागरिक क्षेत्रोंमें तैनात सैनिकों/अर्द्धसैनिकों को वापस बैरकों में बुला लिया जायेगा- चाहे वे क्षेत्र मणिपुर के हों या काश्मीर के, या देश के किसी भी हिस्से के।
2.2    देश के सभी अलगाववादी, अतिवादी एवं हथियारबन्द समूहों के खिलाफ पुलिस/सैन्य कार्रवाई स्थगित करते हुए उनसे यह पूछा जायेगा कि वे भारत राष्ट्र, भारतीय नागरिकों तथा भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान एवं प्रेम की भावना रखते हैं या नहीं- ?
2.3    जिन समूहों का उत्तर हाँमें होगा, उनके नेताओं से बातचीत की जायेगी और संविधान के नीति-निदेशक तत्वों तथा प्रस्तुत घोषणापत्र की घोषणाओं के दायरे में- जहाँ तक सम्भव होगा- उनकी माँगों को मान लिया जायेगा।
2.4    जिन समूहों का उत्तर नहींमें होगा, या जो उत्तर नहीं देंगे, उनपर प्रतिबन्ध लगाया जायेगा; उन्हें गद्दारघोषित किया जायेगा; उन समूहों से जुड़े लोगों की भारतीय नागरिकता और मानवाधिकार समाप्त किये जायेंगे; उनसे किसी भी स्थिति में, किसी भी कीमत पर बातचीत नहीं की जायेगी; उनके विचारकोंको देश-निकाला दिया जायेगा, और उनके हथियारबन्द कार्यकर्ताओं के खिलाफ कमाण्डो दस्तों को उतारते हुए उन्हें मार गिराया जायेगा।
2.5    जो गद्दारविचारक देश छोड़ने के लिए राजी नहीं होंगे, उन्हें 40 दिनों के राशन-पानी के साथ सिन्धु सागर में (अन्तरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में) लंगर डाले (बिना इंजन वाले) एक जलजहाज पर ले जाकर छोड़ दिया जायेगा। (बेशक, उस जहाज में सैटेलाइटफोन की व्यवस्था होगी, जिसकी मदद से ये विचारक किसी भी राष्ट्र से शरण माँगने के लिए स्वतंत्र होंगे।)
2.6    जो गद्दार हथियाबन्द कार्यकर्ता कमाण्डो कार्रवाई के दौरान जिन्दा पकड़े जायेंगे, उन्हें जमीन के नीचे बनी काल-कोठरियों में मृत्युपर्यन्त कैद किया जायेगा।
       आतंकवाद
2.7    पाक-प्रायोजित आतंकवादके खिलाफ जिस रणनीति को अपनाने की जरुरत है, यह राष्ट्रीय सरकार अपने शुरुआती वर्षों में उसे अमल में नहीं ला सकती; कुछ वर्षों में अपनी खुद की सुरक्षा/प्रतिरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबन्द एवं चुस्त-दुरुस्त करने तथा रूस, जापान, जर्मन राष्ट्रों के साथ एक पूर्णकालीन या दीर्घकालीन सन्धि करने के बाद राष्ट्रीय सरकार इस पर अमल करेगी, जिसके तहत पाक-अधिकृत काश्मीर में चलने वाले आतंकवादी शिविरों को घ्वस्त किया जायेगा- इस दौरान अगर युद्ध की स्थिति बनती है, तो युद्ध से भी परहेज नहीं किया जायेगा। (जब तक ऐसा नहीं होता है, पारम्परिक तरीके से ही इस आतंकवाद का मुकाबला किया जायेगा।)
       भेद-भाव
2.8    चूँकि राष्ट्रीय सरकार अपने सभी नागरिकों को एक समान मानेगी, अतः जो कोई भी अपने विचारों या कार्यों से देश के अन्दर जन्म, धर्म, लिंग, रंग, भाषा, क्षेत्र इत्यादि के आधार पर किसी भी तरह का भेद-भाव, ऊँच-नीच, उन्माद, वैमनस्य इत्यादि पैदा करने की कोशिश करेगा- वह बाद में अगर क्षमायाचना करता है- तो उसे पहली बार में चेतावनी, दूसरी बार में जुर्माने तथा तीसरी बार में 3 महीनों के निर्वासनकी सजा दी जायेगी; और अगर वह क्षमायाचना से इन्कार करता है और अपने दकियानूसी एवं कट्टरपन्थी विचारों पर कायम रहता है, तो उसे पहली बार में ही निर्वासनकी सजा दी जायेगी, जो उसके द्वारा क्षमायाचना करने तक जारी रहेगी।
2.9    कहने की आवश्यकता नहीं, निर्वासन के लिए निकोबार द्वीपसमूह के एक टापू को चुना जायेगा, जहाँ जीवन की मूलभूत आवश्यकतायें उपलब्ध रहेंगी- पर्यावरण को नुकसान पहुँचाये बिना।

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