यह घोषणापत्र अर्पित है उन भारतीय नागरिकों व सैनिकों को- जो एक मुर्दा क़ौम में रहते हुए भी- खुद को जिन्दा समझते हैं!

बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

अध्याय- 29: बेसहारों के लिए


29.1   अग्रणी स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से देश में आश्रयों की एक शृँखला (प्रत्येक जिले में एक) कायम की जायेगी, जहाँ लाचार एवं बेसहारा लोगों के लिये भोजन, वस्त्र और आवास की व्यवस्था तो रहेगी ही; उनकी क्षमता के अनुसार बागवानी, दस्तकारी तथा अन्य कुटीर उद्योगों की भी व्यवस्था रहेगी।
29.2   भिक्षावृत्ति प्रतिबन्धित की जायेगी- अर्थात भीख माँगने वालों को निकट के स्वयंसेवी आश्रय में पहुँचाया जायेगा।
29.3   इन आश्रयों में उत्पादित/निर्मित वस्तुओं की बड़ी खरीदार राष्ट्रीय सरकार, राज्य सरकारें और सरकारी कार्यालय होंगे, ताकि इन्हें आर्थिक मदद मिलती रहे।
29.4   इन आश्रयों के लिये सरकार जमीन और भवन उपलब्ध करायेगी; स्टाफ के रुप में अवकाशप्राप्त/बुजुर्ग नगरिकों को नौकरी पर रखा जायेगा, जबकि संचालन की व्यवस्था उन नौजवानों को सौंपी जायेगी, जो भारत की राष्ट्रीय प्रशासनिक सेवाओं (वर्तमान में जिसे आई.ए.एस. कहते हैं) में अधिकारी बनना चाहते हैं (क्रमांक- 1.13)।

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