यह घोषणापत्र अर्पित है उन भारतीय नागरिकों व सैनिकों को- जो एक मुर्दा क़ौम में रहते हुए भी- खुद को जिन्दा समझते हैं!

बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

अध्याय- 33: देह-व्यापार


33.1        देह-व्यापार उन्मूलन की दिशा में पहले से कार्यरत सामाजिक संगठनों को सरकार की ओर से इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिये अधिकृत किया जायेगा और उन्हें हर प्रकार की सहायता उपलब्ध करायी जायेगी।
33.2        इस व्यापार से जुड़ी महिलाओं के पुनर्वास के लिये राष्ट्रीय सरकार कुछ विशेष उद्योग (जैसे- सेना, पुलिस, विद्यालय और अन्यान्य सरकारी विभागों के लिये वर्दियों का सिलाई केन्द्र) स्थापित करेगी और इनके बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के लिये अलग से आवासीय विद्यालय तथा महाविद्यालय भी स्थापित करेगी। (हालाँकि देश के किसी भी विद्यालय/महाविद्यालय में दाखिला लेने के लिये वे स्वतंत्र होंगे।)
33.3        जो महिलायें अपनी इच्छा से इस पेशे में रहना चाहें, उन्हें बाकायदे पंजीकृत कर (नगरवधूका) पहचानपत्र दिया जायेगा, जिसमें नियमित डॉक्टरी जाँच के ब्यौरे भी दर्ज होंगे।
33.4        ‘नगरवधूके अलावे किसी और के द्वारा देह-व्यापार करना इस देश में अपराध माना जायेगा।

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