यह घोषणापत्र अर्पित है उन भारतीय नागरिकों व सैनिकों को- जो एक मुर्दा क़ौम में रहते हुए भी- खुद को जिन्दा समझते हैं!

बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

अध्याय- 35: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी


35.1        जिस देश के वैज्ञानिक, इंजीनियर, तकनीशियन, डिजाइनर इत्यादि मिलजुलकर हाइड्रोजन बम, सुपर कम्प्यूटर, अन्तरमहाद्वीपीय मिसाइल, कृत्रिम उपग्रह इत्यादि बना सकते हैं; वे देश के लिए कुछ भी बना सकते हैं; अतः भारत में सूई से लेकर वायुयान-जलपोत तक हर आवश्यक वस्तु का निर्माण शुरु किया जायेगा। (भारत अपने-आप में एक महादेश भी है, अतः यहाँ हर प्रकार के संसाधन मौजूद हैं।)
35.2        अगर प्रतिभाओं की कमी महसूस की गयी, तो भारत सरकार की ओर से विदेशों में कार्यरत भारतीय वैज्ञानिकों आदि के नाम इस आशय की एक अपील जारी की जायेगी कि भारत माँ को जरुरत आन पड़ी है, और वह विदेशों में जा बसने वाली अपनी मेधावी सन्तानों को वापस बुला रही है...।
35.3        एक सम्पूर्ण भारतीय कम्प्यूटर प्रणाली- जिसमें प्रोसेसर, ऑपरेटिंग सिस्टम से लेकर सभी प्रकार के हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर भारतीय होंगे और जो भारतीय वर्णमालाओं पर आधारित होगी- बनाने की बात अध्याय- 38 में की जा रही है। (बेशक, एक भारतीय इण्टरनेट भी होगा।)
35.4        समुद्रजल के ड्यूटेरियम के नाभिकीय संगलन से ऊर्जा पाने; सुपर कण्डक्टर बनाने; सौर-ऊर्जा को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय सरकार प्रयोगशालायें स्थापित करेगी।
35.5        फ्लाइओवर साइकिल ट्रैक, फ्लाइओवर रेलवे, ‘स्वस्तिकजलाशय परियोजना, बहुद्देशीय राष्ट्रीय पहचानपत्र जैसी कई योजनाओं का जिक्र प्रस्तुत घोषणापत्र में है, जो देश के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों, डिजाइनरों के सामने चुनौतियाँ पेश करेंगी।

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