यह घोषणापत्र अर्पित है उन भारतीय नागरिकों व सैनिकों को- जो एक मुर्दा क़ौम में रहते हुए भी- खुद को जिन्दा समझते हैं!

शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2016

अध्याय- 4: उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार नियंत्रण


4.1    पुलिस, प्रशासन, सेना/अर्द्धसैन्य बल, न्यायपालिका तथा विधायिका के अन्दर उच्च एवं सर्वोच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों के आचरण पर नजर रखने के लिए पंच-परमेश्वरनामक एक अत्यन्त शक्तिशाली स्वायत्त संस्था का गठन किया जायेगा, जिसकी निम्न विशेषतायें होंगीः
                (क) प्रारम्भ में पुलिस, प्रशासन, सेना/अर्द्धसैन्य बल, न्यायपालिका तथा विधायिका से बेदाग चरित्र वाले अवकाशप्राप्त नागरिकों को लेकर इस संस्था का गठन किया जायेगा।
                (ख) पंच-परमेश्वरमें मुख्य पंचोंकी संख्या तो पाँच ही होगी, मगर उनके नीचे पूरी एक टीम होगी, जिसमें 21 से 101 तक सदस्य (व्यस्तता के आधार पर) हो सकेंगे।
                (ग) पुलिस, प्रशासन, सेना/अर्द्धसैन्य बल, न्यायपालिका तथा विधायिका के सर्वोच्च एवं उच्च पदाधिकारियों के आचरण पर यह संस्था नजर रखेगी तथा उनके आचरण से सम्बन्धित तथ्यों, आँकड़ों, सबूतों का संकलन एवं विश्लेषण करेगी।
                (घ) नागरिक अपनी ओर से भी अपने नाम के साथ या गुमनाम रहकर ऐसी जानकारियाँ भेज सकेंगे; साथ ही, जरूरत पड़ने पर पंच-परमेश्वर द्वारा जनमत-सर्वेक्षणभी करवाया जा सकेगा।
                (ङ) प्रत्येक राज्य में भी पंच-परमेश्वरकी एक-एक इकाई होगी, जो राज्यों के सर्वोच्च एवं उच्च पदाधिकारियों के आचरण पर नजर रखेगी।
                (च) थाना स्तर पर इस प्रकार की जो इकाई होगी, उसे पंच-परमेश्वरन कहकर अगले अध्याय में सतर्कता-मजिस्ट्रेटकहा गया है- ये निचले स्तर पर भ्रष्टाचार का खात्मा करेंगे।)
       (छ) भारतीय राष्ट्रीय अन्वेषण ब्यूरो (आज की सी.बी.आई. के स्थान पर), राज्यों के      अन्वेषण ब्यूरो तथा अन्यान्य सभी सरकारी जाँच एजेन्सियाँ पंच-परमेश्वरके   निर्देशानुसार कार्य करेंगी।
                (ज) यह संस्था प्रतिवर्ष अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी, जिसमें अच्छा आचरण रखने एवं नागरिकों/मातहतों की आकांक्षाओं पर खरे उतरने वाले पदाधिकारियों के नाम सफेद सूचीमें दर्शाये जायेंगे।
                (झ) इसके विपरीत, खराब आचरण रखने एवं नागरिकों/मातहतों को परेशान करने वाले अधिकारियों के नाम काली सूचीमें दर्शाये जायेंगे।
       (ञ) जिन अधिकारियों के बारे में यह आशंका होगी कि वे किसी किस्म के भ्रष्टाचार या अपराध में लिप्त हैं, उनके नाम लाल सूचीमें दर्ज किये जायेंगे।
                (ट) बाकी बचे सर्वोच्च/उच्च पदाधिकारियों को अपने-आप भूरी सूचीमें दर्ज मान लिया जायेगा।
                (ठ) सफेद सूचीमें लगातार 3 बार, या कुल-मिलाकर 5 बार दर्ज होने वाले अधिकारियों को 5 वर्षों के लिए पंच-परमेश्वरमें शामिल किया जा सकेगा।
                (ड) इसके विपरीत, ‘काली सूचीमें लगातार 3 बार, या कुल-मिलाकर 5 बार दर्ज होने वालों को तत्काल प्रभाव से 5 वर्षों के लिए निलम्बित कर दिया जायेगा।
                (ढ) लाल सूचीमें दर्ज होने वालों को सूची प्रकाशित होने 24 घण्टों के अन्दर राष्ट्रीय जाँच एजेन्सी द्वारा 90 दिनों के लिए हिरासत में लिया जायेगा, उनपर लगे आरोपों की जाँच की जायेगी और आवश्यकतानुसार आरोपपत्र दाखिल किये जायेंगे।
                (ण) बाकी की कार्रवाई अण्डमान स्थित विशेष न्यायालय में चलेगी- जैसा कि पिछले अध्याय में जिक्र हो चुका है।
                (त) इस मामले में सिर्फ राष्ट्रपति महोदय, प्रधानमंत्री, सर्वोच्च न्यायाधीश तथा मुख्य चुनाव आयुक्त को थोड़ी राहत दी जायेगी- राष्ट्रपति महोदय के विरुद्ध अभियोग लाने से पहले प्रधानमंत्री, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और मुख्य चुनाव आयुक्त से सहमती लेनी होगी; इसी प्रकार, इन तीनों प्रमुखों के विरुद्ध अभियोग लाने से पहले राष्ट्रपति महोदय से अनुमति लेनी होगी (यह सहमति/अनुमति भी सांकेतिक होगी- तीन महीनों में सहमति/अनुमति को प्राप्तमान लिया जायेगा)- बाकी किसी को निलम्बित करने/हिरासत में लेने से पहले किसी से भी अनुमति या सहमती लेने की जरुरत नही रहेगी।

                ***

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें