यह घोषणापत्र अर्पित है उन भारतीय नागरिकों व सैनिकों को- जो एक मुर्दा क़ौम में रहते हुए भी- खुद को जिन्दा समझते हैं!

शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2016

अध्याय- 8: नये सरकारी वेतनमान का खाका


8.1    नये सरकारी वेतनमान (जैसा कि पिछले अध्याय में जिक्र हुआ है) का एक खाका यहाँ प्रस्तुत है- इसमें न्यूनतम व अधिकतम वेतन के बीच 1:15 का अन्तर रखा गया है और उदाहरण के लिए3,000 से 45,000 तक का वेतनमान दिखाया गया है।
8.2    अगले अध्याय में रुपये का मूल्य बढ़ाने की बात कही जा रही है- ऐसे में 3,000 से 45,000 तक की राशि पर्याप्त साबित होनी चाहिए; अगर ऐसा न हो, तो राशि बढ़ाई जा सकती है, मगर अनुपात वही रहेगा- 1:15।
8.3    विभिन्न विभाग अपनी जरुरत के अनुसार किन्हीं दो श्रेणियों के बीच दो नयी श्रेणियों का सृजन कर सकेंगे। (जैसे, 3,000 और 6,000 के बीच 4,000 और 5,000 की दो नयी श्रेणियाँ; या फिर, 21 और 24 हजार के बीच 22 और 23 हजार की दो नयी श्रेणियाँ।)
8.4    इस वेतनमान में वार्षिक वेतनवृद्धि का जिक्र नहीं है- इसे विशेषज्ञ तय करेंगे, मगर इतना तय होगा कि 30 वर्षों की सेवा होते-होते सभी कर्मी अपने वेतनमान के उच्चतम विन्दु पर पहुँच जायेंगे।
8.5    इसी प्रकार, भत्तों का भी जिक्र इसमें नहीं है, मगर वह जो भी होगा, उसका भी अनुपात 1:15 ही होगा।
8.6    इस वेतनमान में खिलाड़यों को भी वेतन देने का प्रावधान है; उनका सक्रिय खेल जीवन आम तौर पर 10-12 वर्षों का होता है, इसके बाद उन्हें खेल-प्रशिक्षक के रुप में अथवा वेतनमान के आधार पर सामान्य नौकरियों में समायोजित कर लिया जायेगा।
8.7    अर्द्धसैन्य बलों में यह वेतनमान 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ लागू होगा और सशस्त्र सेनाओं में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ।
8.8    पुराना वेतनमान पाने वाले अगर चाहें, तो नये वेतनमान को स्वीकार कर नयी सेवा में शामिल हो सकते हैं, अन्यथा-
       (क) जिनकी नौकरी 15 वर्ष से अधिक होगी, उन्हें पेन्शन पर भेज दिया जायेगा;
       (ख) जिनकी नौकरी 15 वर्ष से कम होगी, उन्हें 15 वर्ष पूरा होने तक घर बिठाये’ ‘मूल वेतनदिया जायेगा और उसके बाद पेन्शन पर भेजा जायेगा।

       वेतनमान
श्रेणी          
न्यूनतम योग्यता
3,000-12,000
अकुशल श्रमिक
अशिक्षित/साक्षर
6,000-12,000
कुशल श्रमिक
अल्पशिक्षित (10वीं से नीचे)/पदोन्नति से
9,000-27,000
कनिष्ठ कर्मचारी 
10वीं या समतुल्य
12,000-27,000              
मध्यम श्रेणी के कर्मचारी
12वीं या समतुल्य/10वीं प्रथम श्रेणी/पदोन्नति से/राज्य स्तरीय खेलों में खेलने वाले खिलाड़ी- वेतन राज्य सरकार द्वारा
15,000-27,000
उच्च श्रेणी के कर्मचारी
स्नातक या समतुल्य/12वीं प्रथम श्रेणी/पदोन्नति से/राष्ट्रीय खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ी
18,000-36,000
पर्यवेक्षक
स्नातकोत्तर या समतुल्य/स्नातक प्रथम श्रेणी/पदोन्नति से/अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ी
21,000-42,000
कनिष्ठ अधिकारी
स्नातक +  सामाजिक, सांस्कृतिक, साहसिक कार्य/स्नातक + किसी विषय में विशेषज्ञता/डॉक्टरेट/नयी खोज या नया आविष्कार करने वाले/किसी क्षेत्र या विधा में देश का नाम रोशन करने वाले/ओलिम्पिक खिलाड़ी
24,000-42,000
मध्यम श्रेणी के अधिकारी
पदोन्नति से
27,000-42,000
उच्च अधिकारी
पदोन्नति से
30,000-42,000
अध्यक्ष पद के अधिकारी
पदोन्नति से
33,000
विधायक
जनता द्वारा चयनित
36,000
सांसद/मुख्यमंत्री
जनता द्वारा चयनित
39,000
प्रधानमंत्री
जनता द्वारा चयनित
42,000
उपराष्ट्रपति
सामाजिक/सांस्कृतिक संस्थाओं तथा जनप्रतिनिधियों द्वारा चयनित
45,000
राष्ट्रपति
सामाजिक/सांस्कृतिक संस्थाओं तथा जनप्रतिनिधियों द्वारा चयनित
                

1 टिप्पणी:

  1. घोषणापत्र के 'अध्याय- 8: नया सरकारी वेतनमान: एक खाका' पर स्पष्टीकरण।
    यह घोषणापत्र न्यूनतम व अधिकतम सरकारी वेतन के बीच 1:15 के अनुपात की बात करता है और दिये गये टेबल में "उदाहरण के लिए" 3,000 से 45,000 के वेतनमान का जिक्र किया गया है। यह सबको खटक रहा है कि इतना कम वेतनमान क्यों? इसके पीछे दो कारण हैं- 1. इस घोषणापत्र को 1995 से लिखा जा रहा है और तब के हिसाब से यह पर्याप्त था; 2. इसके अगले ही अध्याय में "रुपये के मूल्य" को बढ़ाने की बात कही गयी है, जिस कारण यह वेतनमान ही पर्याप्त हो जायेगा। आज हमारे शासकगण कुछ प्रकट व कुछ गोपनीय कारणों से रुपये के मूल्य को जानबूझ कर गिराते हैं- इस प्रक्रिया को उलट दिया जायेगा।
    दूसरी बात- यह टेबल "उदाहरण के लिए" है- For Example. अगर विशेषज्ञगण राष्ट्रपति महोदय के लिए 90,000 का मासिक वेतन तय करना चाहें, तो उन्हें अकुशल श्रमिक के लिए 6,000 का मासिक वेतन तय करना होगा। इसी प्रकार, अगर राष्ट्रपति का वेतन 1,50,000 तय हो, तो अकुशल श्रमिक का 10,000 का तय होगा; राष्ट्रपति का वेतन अगर 3,00,000 तय हो, तो अकुशल श्रमिक का 20,000 तय होगा; राष्ट्रपति का वेतन अगर 4,50,000 तय हो, तो अकुशल श्रमिक का वेतन 30,000 तय करना होगा।
    जाहिर है, न तो भारतीय रुपये की अभी इतनी दुर्गति हुई है और न ही कोई आर्थिक विशेषज्ञ एक "अकुशल मजदूर" को 30,000 का वेतन देना चाहेगा, इसलिए 3,000 से 45,000 का जो वेतनमान टेबल में दिया गया है- आवश्यकतानुसार उसमें थोड़ी-सी ही बढोतरी की जरुरत पड़ेगी। और अगर "रुपये के मूल्य" को 1980, 1960, या 1940 के स्तर पर पहुँचा दिया गया, तो शायद वेतनमान को उल्टे और घटाने की नौबत आ जायेगी! (यह तो मत ही कहिये कि यह असम्भव है- फिर दुहरा दिया जाय कि रुपये का मूल्य अपने-आप गिरता नहीं है, इसे एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत गिराया जाता है! इस सम्बन्ध में मेरा एक आकलन यहाँ है- http://jaydeepdeshduniya.blogspot.in/2014/12/blog-post.html)

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